कहीं आप भी तो नहीं सोशल फोबिया के शिकार? इन उपायों से इलाज है संभव

कहीं आप भी तो नहीं सोशल फोबिया के शिकार? इन उपायों से इलाज है संभव
लाइफस्टाइल डेस्कः बहुत सारे दोस्तों के बीच जब बातचीत करने में हिचकिचाहट हो, अकेले कहीं बाहर जाने से कतराते हों, किसी के पास में खड़े होने या बैठ जाने से लिखना और फोन पर बात करने में परेशानी महसूस हो तो सोचने की जरूरत है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। दरअसल ये एक प्रकार की समस्या होती है जिसमें व्यक्ति सोशल होने से घबराता है। साइंस के टर्म में इसे सोशल फोबिया कहा जाता है। सोशल एंजाइटी डिसऑर्डर भारत में दूसरी सबसे आम समस्या है।
क्या है सोशल फोबिया
इस फोबिया के शिकार लोग सामने तो डरते ही हैं साथ ही इमेजिन करके भी डरते रहते हैं। किसी भी काम को करने से इसलिए कतराते हैं क्योंकि लोग उनपर हंसेंगे। जी चुराते हैं, गुमसुम रहते हैं और अपनी फीलिंग किसी से भी शेयर नहीं करते जिससे कई प्रकार के मेंटल प्रॉब्लम का शिकार होते जाते हैं।
ऐसी कोई गंभीर बीमारी न होने के कारण इसके मरीज आम लोग जैसे ही होते हैं बस कुछ खास सिचुएशन में ही इन्हें पहचाना जा सकता है। डर लगने पर घबराहट होना इस बीमारी का सबसे पहला और खास लक्षण है।
किसी से भी आंख मिलाकर बात न करना
दिल की धड़कन बढ़ना
पेट दर्द होना
पसीना आना
बेचैनी, सांसों का तेज होना
चक्कर आना
कान में अलग-अलग प्रकार की आवाजें सुनाई देना
ब्लड प्रेशर बढ़ना और कम होना
सिसदर्द होना
ये सारे लक्षण इस बीमारी के अन्य संकेत हैं।
इस बीमारी के कारण
सोशल फोबिया के बढ़ने में बायोलॉजिकल, साइकोलॉजिकल और एनवायरमेंटल फैक्टर्स बहुत ही अहम होते हैं।
फैमिली का एनवायरमेंट इसे बढ़ाने में बहुत ज्यादा मायने रखता है। बच्चे की कहीं भी बहुत ज्यादा उपेक्षा नहीं करनी चाहिए इस बीमारी के फैलने का सबसे बड़ा कराण यही होता है।
ज्यादातर यह बीमारी 20 साल या इससे कम उम्र में होती है।
सेल्स कॉन्फिडेंस न होने की वजह से भी यह फोबिया होता है।
सोशल फोबिया आनुवांशिक बीमारी भी होती है।
किसी एक्सीडेंट के बाद उसका डर मन में बैठ जाने से भी इस फोबिया के शिकार लोग हो जाते हैं।
सोशल फोबिया का इलाज
इसके शिकार लोगों के दिमाग में बस वही सब बातें चलती रहती हैं कि कहीं लोगों के सामने बोलने की नौबत आ गयी तो क्या होगा। वो इमेजिन करके डरते और घबराते रहते हैं।
सबसे पहले किसी डॉक्टर की हेल्प लें। साइकोलॉजिस्ट इस समस्या को समझ कर उसका उपाय निकालने की कोशिश करते हैं।
डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को सही टाइम पर खाना चाहिए क्योंकि इससे काफी राहत मिलती है।
काउंसलर की हेल्प लेकर भी इस बीमारी को दूर किया जा सकता है। साथ ही इससे कॉन्फिडेंस भी बढ़ता है।
योगा, मेडिटेशन भी इस बीमारी से राहत दिलाने में बहुत ही मददगार होता है।

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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