सेबी ने कैंसल किया सहारा के म्युचुअल फंड्स का रजिस्ट्रेशन

सेबी ने कैंसल किया सहारा के म्युचुअल फंड्स का रजिस्ट्रेशन

सेबी ने कैंसल किया सहारा के म्युचुअल फंड्स का रजिस्ट्रेशन

नई दिल्ली: मार्केट रेगुलेटरी बॉडी सेबी ने कारोबारी ग्रुप सहारा के म्युचुअल फंड्स का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। सेबी ने आदेश दिया है कि सहारा अपना म्युचुअल फंड्स से जुड़ा बिजनेस किसी दूसरी कंपनी को जल्द से जल्द सौंप दे। सेबी ने अपने आदेश में कहा कि सहारा ग्रुप फिलहाल इस बिजनेस को चलाने के लिए फिट नहीं है। बता दें कि सेबी इससे पहले सहारा की पोर्टफोलिया मैनेजमेंट का लाइसेंस भी खारिज कर चुकी है। सहारा और सेबी के बीच बीते एक साल से विवाद चल रहा है। निवेशकों का पैसा न लौटाने की वजह से सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय काफी वक्त से जेल में हैं।
क्या आदेश है सेबी का
सेबी के मुताबिक, यह रजिस्ट्रेशन मंगलवार से अगले छह महीने तक के लिए रद्द रहेगा। रेगुलेटरी बॉडी ने सहारा म्युचुअल फंड्स और सहारा एसेट्स मैनेजमेंट कंपनी से यह भी कहा है कि वे अपने वर्तमान या नए ग्राहकों का सब्सक्रिप्शन तत्काल बंद करें। सहारा म्युचुअल फंड्स के बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज को यह भी कहा गया है कि वे निवेशकों के हितों का ध्यान रखें। इसके अलावा, बिजनेस के ट्रांसफर होने के बाद फिर से बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज का गठन हो। अगर सहारा ग्रुप सेबी की बताई सभी प्रोसेस पांच महीने में पूरी नहीं करता तो उसे निवेशकों को अलॉट किए गए म्युचुअल फंड्स का पैसा 30 दिन में बिना किसी चार्ज के लौटाना होगा।
क्या है सहारा समूह का विवाद?
सहारा समूह की अपने 2 कंपनियों-सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SIRECL) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (SHICL) ने रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर 3 करोड़ से अधिक निवेशकों से 17,400 करोड़ रुपए जुटाए थे। सितंबर, 2009 में सहारा प्राइम सिटी ने आईपीओ लाने के लिए सेबी के पास दस्तावेज जमा किए, जिसके बाद सेबी ने अगस्त 2010 में दोनों कंपनियों की जांच के आदेश दिए थे। कंपनियों में अनियमितता मिलने पर विवाद बढ़ता गया और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दोनों कंपनियों को निवेशकों के 36 हजार करोड़ रुपए लौटाने का आदेश दिया है।
कहा, नहीं चुका पाएंगे इतने पैसे
सुब्रत रॉय ने 7 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वे 18 महीने में 36 हजार करोड़ रुपए नहीं चुका पाएंगे। उनकी तरफ से कोर्ट को बताया गया कि दुनिया का कोई भी बिजनेस हाउस इतने कम समय में इतनी बड़ी रकम नहीं चुका सकता। इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस रकम को तो चुकाना ही पड़ेगा। कोर्ट के इस कमेंट पर सहारा के वकील कपिल सिब्बल ने कहा, ‘रकम चुकाए जाने की जरूरत को लेकर कोई विवाद नहीं है।’
जमानत के लिए जरूरी है रकम चुकाना
इसी साल 19 जून को सुप्रीम कोर्ट ने मार्च, 2014 से तिहाड़ जेल में कैद सुब्रत रॉय की जमानत को मंजूरी देते हुए यह शर्त लगा दी थी कि रिहाई के लिए उन्हें 5 हजार करोड़ रुपए की बैंक गारंटी और 5 हजार करोड़ कैश जमा करने होंगे। रिहाई के 18 महीनों के भीतर 9 किश्तों में 36000 करोड़ रुपए अदा करने होंगे। यही नहीं, रिहाई के बाद सुब्रत रॉय को हर 15 दिन में दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में हाजिरी लगानी होगी।

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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