सुभाष उद्यान में बच्चो की मिनी ट्रैन की खुली पोल, 4 माह में ही इंजन की क्रेंक टूटी कौन कौन है इसके जिम्मेदार

सुभाष उद्यान में बच्चो की मिनी ट्रैन की खुली पोल, 4 माह में ही इंजन की क्रेंक टूटी कौन कौन है इसके जिम्मेदार

*BDN*
*सुभाष उद्यान में बच्चो की मिनी ट्रैन की खुली पोल, 4 माह में ही इंजन की क्रेंक टूटी कौन कौन है इसके जिम्मेदार*
सुभाष उद्यान में बच्चो की मिनी ट्रैन शुरू से ही विवादों से घिरी रही है और अभी भी इसका विवादों से पीछा नही छूट रहा है ।
*में ट्रेन हु, मेरी भी भावना है :-* में यानी ट्रैन ने यह निश्चय कर लिया है कि मेे नगर परिषद के भ्रस्टाचार को ओर उसके करने में जिस जिस ने सहयोग किया है ओर 25 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी मुझे शहर के नागरिकों से बेरुखी झेलनी पड़ी,शर्मिंदा होना पड़ा, में उन सब के बीच हंसी का पात्र बनी, शहर के छोटे छोटे नन्हे मुंह बच्चो ने मेरी सवारी करने के लिए बरसो इंतजार किया उनकी आंखें तरस गई मेरे को चलते हुए देखने के लिए, ओर अब में जब चल रही हु तो मेरे साथ कितना अन्याय हुवा है, यह आप देख ही रहे हो, पहले तो राजनीति के दांव पेंच में 4 वर्ष खड़ी रही, ओर घटिया इंजन लगा कर मुझे चलाया गया, यह आप सब के सामने है, मेने भी निश्चय किया है कि मेरे साथ ना इंसाफी करने वालो को में धीरे धीरे बेनकाब करूंगी ।
*जी हा यह है बच्चा ट्रैन की दिल की बात*
कुछ अनसुलझे सवाल जिसके जवाब मिलने से कई राज खुल सकते है, ओर इस मिनी ट्रैन में हुए भ्रस्टाचार की पोल खुल सकती है और फोटो छाप नेताओ की जुबान पर ताले लग सकते है ।
@ जब ठेकेदार को लम्बे समय से एनओसी नही मिली और ठेकेदार को अपना भुगतान लेना था तो दिसंबर 2016 में उसके इंजनियर लगातार रात ओर दिन 10 दिनों तक उसे ठीक करने में लगे रहे कि येन केन प्रकरेण यह चालू हो जाये और उसे एनओसी मिल जाये तो भुगतान ले कर अपना उल्लू सीधा करू, एक बार तो इसको खिंचने वाला हुक ही टूट गया । बड़ी मुश्किल से जुगाड़ करने के बाद यह चालू हुई और मिलिभगत से एनओसी ली और भुगतान उठा लिया ।
@ मात्र चार साल पुरानी ट्रैन में 24 वर्ष पुराना 1990 मॉडल के इंजन को रंग रोशन करके इंजन क्यो लगाया । इस इंजन की जांच किस इंजीनियर ने की ओर इसे किसने NOC दी, ठेकेदार से इंजन का बिल व गारंटी कार्ड क्यो नही लिया गया ?
@ ठेकेदार ने इस ट्रैन में लगे इंजन को 12 HP का बताया था जबकि यह तो मात्र 5 HP का महज तीन सिलेंडर वाला इंजन निकला ।
किस किस इंजीनियर, प्रशानिक अधिकारी, आयुक्त ओर नेता ने इस इंजन की जांच कर इसको क्लीन चिट दी और ठेकेदार को इसका भुगतान करवा गया । यह जांच का विषय है ।
@ ट्रेन का ट्रैक छोटा क्यो है ?
@ ट्रैन के पुराने, घटिया ओर खराब इस इंजन मे मात्र चार माह में ही इंजन की क्रेंक टूट गई ।
@ ट्रैन सप्लाई करने वाले ठेकेदार से जब संचालन करने वाले प्रकाश रिणवा ने बात की तो उसका दो टके का दो टूक जवाब मिला और कहा कि मेरे को तो 3 साल पहले हु NOC मिल गई ।
प्रश्न अब यह है कि किस ने उसे NOC दी और किस आधार पर दी, किस के कहने पर दी, यह जांच के विषय है ?
@ ट्रैन का संचालन करने का जज्बा लिए ओर बच्चो का मनोरंजन करने के लिए ठेकेदार प्रकाश रिणवा अपनी जेब से 70000 रुपये खर्च कर नया इंजन लगा कर इसको चलाने के लिए पुनः तैयार किया है । उनके इस जज्बे ओर बच्चा प्रेम को साधुवाद, नही तो यदि इंजन खराब होने पर यदि नगर परिषद के भरोसे रहता तो न जाने यह कब चालू होती ।
@ क्या नगर परिषद उस ट्रैन सप्लाई करने वाली नागपुर की ठेकेदार फर्म के खिलाफ परिषद को धोखा देने और गलत माल की सप्लाई देने पर (जो कि साबित भी हो चुका है ) इसके लिए उसके खिलाफ थाने में धोखा धड़ी का मुक़दमा दर्ज करवायेगी, या उसको बचाने के लिए कोई नई रणनीति बनाई जाएगी ।
*हेमेन्द्र सोनी @ BDN जिला ब्यावर*ह

Categories: Beawar, Sampadak Ki Kalam

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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