शाेषण के खिलाफ उतरे कर्मचारी

शाेषण के खिलाफ उतरे कर्मचारी

प्लेसमेंटएजेंसी की मनमानी के खिलाफ अस्पताल के ट्रॉलीमेन भी आंदोलन पर उतर गए हैं। मंगलवार को ना सिर्फ कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया बल्कि अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी भी की। इन कर्मचरियों के साथ कंप्युटर ऑपरेटर और हेल्पर भी शामिल थे।

गौरतलब है कि गत मंगलवार को हुई एमआरएस की मीटिंग में निर्णय लिया गया कि अस्पताल में प्लेसमेंट एजेंसियों के मार्फत लगे सभी कर्मचारियों को एमआरएस में समायोजित कर लिया जाएगा, और प्लेसमेंट एजेंसियों को बेदखल कर कर्मचारियों को शोषण से मुक्ति दिलवाई जाएगी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा हठधर्मिता अपनाते हुए आदेश के बाद भी नई प्लेसमेंट एजेंसियों को ठेके के अनुरूप काम करने की स्वीकृति दे दी गई।

डेढमहीने का दिया समय

एमआरएसकी मीटिंग में निर्णय होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा ज्वाइंट डाइरेक्टर डॉ. गजेंद्र सिंह सिसोदिया और विधायक शंकर सिंह रावत के निर्देशों की अवहेलना करते हुए नए टेंडर के तहत काम शुरू कर दिया गया। इस मामले के सामने आने पर विधायक शंकर सिंह रावत ने गंभीरता दिखाते हुए मंगलवार को जयपुर स्वास्थ्य निदेशालय में इसकी शिकायत की और जांच की मांग उठाई। इस पर ज्वाइंट डाइरेक्टर ने पीएमओ और अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि सभी टेंडर को निरस्त कर आगे की कार्रवाई से एमआरएस सदस्यों को अवगत करवाएं।

नियमानुसारवेतन नहीं देने का आरोप

मंगलवारको विरोध जता रहे ट्रॉलीमेन ने आरोप लगाया कि उनका ठेका हुए 8 महीने से ज्यादा हो गए। ठेकेदार उनका तब से लगातार शोषण कर रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार ने उन्हें 4 हजार 200 रुपए प्रतिमाह वेतन देने का आश्वासन दिया। लेकिन हर माह ठेकेदार कर्मचारियों को 3 हजार 500 या 3 हजार रुपए ही दे रहा है। हर महीने किसी ना किसी बहाने से वेतन काट लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो महीने से तो ठेकेदार उन्हें वेतन ही नहीं दे रहे हैं। विरोध करने वालों में राहूल, उमेश, सतीश, महेश, विशाल, दिलीप, दिपेश, रवि समेत अन्य कर्मचारी शामिल थे।

भास्कर न्यूज|ब्यावर

प्लेसमेंटएजेंसी की मनमानी के खिलाफ अस्पताल के ट्रॉलीमेन भी आंदोलन पर उतर गए हैं। मंगलवार को ना सिर्फ कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताया बल्कि अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ नारेबाजी भी की। इन कर्मचरियों के साथ कंप्युटर ऑपरेटर और हेल्पर भी शामिल थे।

गौरतलब है कि गत मंगलवार को हुई एमआरएस की मीटिंग में निर्णय लिया गया कि अस्पताल में प्लेसमेंट एजेंसियों के मार्फत लगे सभी कर्मचारियों को एमआरएस में समायोजित कर लिया जाएगा, और प्लेसमेंट एजेंसियों को बेदखल कर कर्मचारियों को शोषण से मुक्ति दिलवाई जाएगी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा हठधर्मिता अपनाते हुए आदेश के बाद भी नई प्लेसमेंट एजेंसियों को ठेके के अनुरूप काम करने की स्वीकृति दे दी गई।

डेढमहीने का दिया समय

एमआरएसकी मीटिंग में निर्णय होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा ज्वाइंट डाइरेक्टर डॉ. गजेंद्र सिंह सिसोदिया और विधायक शंकर सिंह रावत के निर्देशों की अवहेलना करते हुए नए टेंडर के तहत काम शुरू कर दिया गया। इस मामले के सामने आने पर विधायक शंकर सिंह रावत ने गंभीरता दिखाते हुए मंगलवार को जयपुर स्वास्थ्य निदेशालय में इसकी शिकायत की और जांच की मांग उठाई। इस पर ज्वाइंट डाइरेक्टर ने पीएमओ और अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिए कि सभी टेंडर को निरस्त कर आगे की कार्रवाई से एमआरएस सदस्यों को अवगत करवाएं।

नियमानुसारवेतन नहीं देने का आरोप

मंगलवारको विरोध जता रहे ट्रॉलीमेन ने आरोप लगाया कि उनका ठेका हुए 8 महीने से ज्यादा हो गए। ठेकेदार उनका तब से लगातार शोषण कर रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि ठेकेदार ने उन्हें 4 हजार 200 रुपए प्रतिमाह वेतन देने का आश्वासन दिया। लेकिन हर माह ठेकेदार कर्मचारियों को 3 हजार 500 या 3 हजार रुपए ही दे रहा है। हर महीने किसी ना किसी बहाने से वेतन काट लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो महीने से तो ठेकेदार उन्हें वेतन ही नहीं दे रहे हैं। विरोध करने वालों में राहूल, उमेश, सतीश, महेश, विशाल, दिलीप, दिपेश, रवि समेत अन्य कर्मचारी शामिल थे।

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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