क्या आम जनता ने इसलिए चुनी शहर की सरकार ?

क्या आम जनता ने इसलिए चुनी शहर की सरकार ?

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? क्या आम जनता ने इसलिए चुनी शहर की सरकार ?
शहर में जनता ने जिस शहर की सरकार को चुना हे उसका आम जनता को कितना लाभ मिल रहा हे, इसका नजारा शहर के गली मोहल्ले और कालोनियो के भ्रमण पे साफ देखा जा सकता हे ।
जो कार्य परिषद को और पार्षदों को दायित्व समझ कर करना होता हे उसके लिए भी जनता को ज्ञापन और आंदोलन का सहारा लेना पड़ता हे और तो और जब तक वो खबर अखबारो की सुर्खियां नहीं बन जाती तब तक उसका कोई समाधान नहीं होता, तो फिर शहर की ऐसी सरकार को चुनने का क्या फायदा । जब आंदोलन ही करना हे और ज्ञापन ही देना हे, और अखबार में, SDM को आयक्त को, सभापति को बार बार जाकर शिकायत करके ही अपने काम करवाने हे तो फिर वोट देने का क्या फायदा । केवल इसलिए वोट दे की वो जितने के बाद जन प्रतिनिधि आम जनता पे हुकूमत करे या आम आदमी को अपने जायज काम के लिए परिषद में जूते घिसने पड़े और नाजायज काम वाले मोज करे । छोटे छोटे कार्य जिसमे जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह प्रमाण पत्र, आदि आदि के लिए चक्कर लगाने पड़ते हे ।ना समय पे नक्शा पास होता हे, ना समय पे टूटी सड़के ठीक होती हे, ना समय पे सफाई होती हे, शहर में जगह जगह गन्दी से सड़ते मोहल्ले नजर आ जाएंगे, किसी गली की नाली टूटी हो तो पार्षद को शिकायत करने के बाद भी महीनो तक ठीक नहीं होती चाहे उस तरफ से निकलना तक दूभर हो रहा हो, और तो और किसी सड़क पे नाली के ऊपर का फेरो ब्लॉक भी टूट जाए तो वो तब तक नहीं लगता जब तक की वो अखबारो और सोशियल मिडिया की सुर्खियां ना बन जाए । आवारा जानवरो से शहर में अनगिनत हादसे हो रखे हे और ट्रैफिक में बाधा भी जानवरो के कारण आती हे लेकिन 2 वर्ष में भी जनता को इससे निजात नहीं मिली । शहर के मध्य कॉम्पलेक्सों की पार्किग गायब हे, भवन मालिको ने उस पार्किंग को मिली भगत कर खुर्द बुर्द कर दिया और अपनी जेब भर ली जिस कारण शहर के बाजारों में अतिक्रमण मुख्य समस्या बन गई हे और दुकानदारो द्वारा मार्ग में अपने सामानों से अतिक्रमण कर आम जनता की परेशानी बढ़ा रहे हे उन पे स्थाई रूप से कोई कार्यवाही नहीं होती ।
शहर के मध्य चलता अवैध बूचड़ खाना शहर वासियो के लिए किसी नर्क से कम नहीं हे , सड़को की चौड़ाई का मास्टर प्लान परिषद के ना जाने कोनसी फ़ाइल में दफ़न हे । शहर की ऐसी कई कालोनिया और शहर के मध्य में ऐसी कई गलिया हे जिसमे अतिक्रमण का स्तर आकण्ठ तक डूबा हुवा हे । शहर के वैवाहिक स्थलो के आस पास रहने वालो की हालात तो नर्क के सामान हो रही हे जब भी शादियों का सीजन होता हे गंदगी, और तेज आवाज में डी जे साउंड, और पार्किंग का दंश झेलने को मोहल्ले वासी मजबूर हो जाते हे लेकिन शिकायत के बावजूद भी भवन मालिक को पाबन्द नहीं किया जाता ।
परिषद के बाहर बनी प्याऊ को बने हुए एक वर्ष हो गया लेकिन उसका उदघाटन अभी तक नहीं हुवा दानदाता का पैसा धूल खा रहा हे, ऐसा लगता हे की प्याऊ का उदघाटन मोदी से कराने के लिए परिषद प्रयास कर रही हे और मोदी समय नहीं दे रहे हे ?
मेगा रोड का दुसरा चरण ना जाने कहा खो गया किसी को नहीं पता, लगता हे इस मुद्दे पे सारे जन प्रतिनिधि सो गए हे या किसी विशेष कारण वश बोलना नहीं चाहते हे ?
शहर की ऐसी हालात के लिये दोनो मुख्य पार्टिया जिम्मेदार हे, फिर भी उसको सुधारने के लिए कोई भी बीड़ा उठाने को तैयार नहीं हे ।
अपने मोहल्ले की उस रोड पे एरिया का पार्षद आँख मुंद के निकलता हे, क्या उसका दायित्व नहीं होता हे की वो मोहल्ले की समस्या को प्राथमिकता से समाधान करे ।
ना शहर के मध्य से होकर गुजर रही महत्वपूर्ण यात्री ट्रेनों के ठहराव के लिए, ना शहर मे उद्योग धंधो और ना ही कुटिर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए, ना विकास की योजनाओ को मूर्त रूप देने की इच्छा शक्ति नजर आती हे और ना विकास की कार्ययोजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए पक्ष और विपक्ष एक साथ खड़े नजर आते हे ।
एरिया पार्षद समय पे निर्माणाधीन अतिक्रमण को रोकते नहीं हे, और निर्माण के बाद नोटिस देकर परेशान करते हे, क्या निर्माण के समय एरिया के पार्षद की आँखे बंद थी, उसने समय रहते क्यों शिकायत नहीं की, क्यों आँखे मुंद कर उसको बढ़ावा दिया ? जनता सब समझती हे ।
एक और उदाहरण से अपनी बात बताना चाहता हु की जेसे किसी रोड पे प्रभावशाली और बाहुबली ने अपने मकान के बाहर 10/15 फुट का अतिक्रमण कर रखा हे और उसी रोड पे उसी लाइन में किसी ने 4/5 फुट का अतिक्रमण कर रखा हे तो बजाय 10/15 फुट वाले अतिक्रमी को हटाने के 4/5 फुट वाले को आँख की किरकिरी समझते हे । जबकि अतिक्रमण किसी का भी हो सहन योग्य नहीं होता ।
अपने स्वार्थो की लड़ाई में ना तो समय पे GC की मीटिंग बुलाते हे और मीटिंग के लंबे लंबे समय तक ना होने के कारण शहर के विकास को ब्रेक लग जाता हे केवल अपने और अपनों के कार्य और भत्ते बढ़ाने के लिए सब एकजुट हो जाते हे लेकिन जनता के कार्यो के प्रति उदासीन रहते हे ।
परिषद का वर्तमान कार्यकाल धीरे धीरे निकल रहा हे लेकिन शहर के लोगो ने जिस उम्मीद से सरकार चुनी थी उस उम्मीद पे वो खरी नहीं उतरी ।
सभापति और आयुक्त का कर्तव्य हे की कुछ दिनों के अंतराल में शहर का और वार्डो का दौरा कर अपनी आँखों से शहर का नजारा देखे और उसका समाधान करे लेकिन उस दौरे को हुए तो ना जाने कितना समय हो गया ।
हेमेन्द्र सोनी @ BDN ब्यावर

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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