हमारे ब्यावर में चुनाव है, क्या होगा ब्यावर का भविष्य ?

हमारे ब्यावर में चुनाव है, क्या होगा ब्यावर का भविष्य ?

*BDN*
👉 *हमारे ब्यावर में चुनाव है* 👈
*क्या होगा ब्यावर का भविष्य*
*कौन होगा भावी विधायक ?*
*या इस बार भी जनता और कार्यकर्ता की भावनाओ का गला घोंटा जाएगा?*
*क्या इस बार चुना जाएगा ऐसा विधायक जो ब्यावर के लिए सोच सके?*
*क्या हर बार की तरह इस बार फिर राजनेताओ द्वारा छला जायेगा ब्यावर?*
जी हां विधान सभा चुनावो का बिगुल बजने के बाद से ही नेता लोगो की भाग दौड़ चालु हे, कार्यकर्ताओं की मान मनुहार में लगे हुए है ।
प्रमुख दलों भाजपा, काँग्रेस और आप पार्टी ब्यावर और निर्दलीय उम्मीदवारों द्वारा चुनावी प्रचार जारी हे |
येन केन प्रकरण शाम दाम दंड भेद से चुनाव जितना ही एक मात्र लक्ष्य हे |
परंपरागत वोट के साथ कई जातिवाद के आधार पर ओर कई अपने रसूखात के आधार पर चुनाव जितने की जूगाड़ में लगे है ।
विकास और समस्या समाधान के नाम सब पर मौन हे |
शहर की प्रामुख समस्याओ में ट्रफिक, मुख्य बाजारों में अतिक्रमण, नियम विरुद्ध तंग गलियों में अवैध काम्प्लेक्स, काम्लेक्सो और मार्केटो में पार्किंग के स्थानों पर अवैध निर्माण के कारण सडको पर होने वाली पार्किंग से प्रभावित होता ट्रेफिक | नरक परिषद का भ्रष्टाचार, सीवरेज और अमृत योजना के नाम पर खोदी शहर की सडको की दुर्दशा, टूटी सडको के कारण उडती धुल से बीमार होता ब्यावर का आम नागरिक, लेट लतीफी पर आंसू बहता गोरव पथ, सतपुलिया विस्तारीकरण का धीमा कार्य, व्यापारियों की पाली बाजार का डिवाईडर हटाने की मांग, चांग गेट से टाटगढ़ रोड का रुका हवा विस्तारिकरण, शहर के विकास की राह में रोड़े बने हुए हे, विकास तो हवा नहीं किन्तु विकास के नाम पर शहर की जनता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हे, जलदाय विभाग पानी की सप्लाई नियमित तो दूर की बात 48 घंटे के अंतराल से होने वाली सप्लाई को बिना किसी सुचना के 72 घंटे कर दिया और उस पर भी नियमित सप्लाई करने में अपने आपको असहाय समझ रहा है | रेलवे अन्डर पास में भरता पानी और छावनी फाटक बाहर लम्बे समय से टूटी सडक वहा के कालोनी वासियों के लिए किसी दंश से कम नहीं, खेल स्टेडियम को तरसते खिलाड़ी |
ये शहर की भ्रष्ट राजनीति की परिणीति है । नेताओ ओर पार्षदों की नाकामी है जो कि अपने अपने इलाके के लिए समर्पित नही है उन्हें केवल सत्ता की मलाई खाने का शोक है ।
ब्यावर में एक रवैया हो गया है कि पहले जनता की सहन शक्ति को परखो और तब तक उसे परेशान होने के लिये छोड़ दे, उसके बाद जनता जब हाथ जोड़ कर विनती करे तब उसके लिए अपनी कॉलर ऊंची करते हुए उस शिकायत पर कार्यवाही करो ओर वाह वाही लूटो और अखबार में फोटो छपाओ पोस्टर छपाओ और उसे विकास का नाम दे दो |
इससे यह स्पष्ट हे की विकास के नाम पर जनता के विस्वास को किस तरह कुचला जा रहा है |
इन सब के बावजूद भी शहर की जनता को होने वाली परेशानी से सत्ता पक्ष तो क्या विपक्ष को भी कोई चिंता नहीं हे उन्हें तो केवल वोट दे दो |
*लेकिन यह जनता हे चुनाव का समय आने पर सब का ब्याज सहित पूरा पूरा हिसाब करती हे |*
*हेमेन्द्र सोनी @ BDN जिला ब्यावर*

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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