शहर का एक ओर दुर्भाग्य आया सामने अस्पताल की जगह बनेगी केंटीन

शहर का एक ओर दुर्भाग्य आया सामने अस्पताल की जगह बनेगी केंटीन

*BDN*
*शहर का एक ओर दुर्भाग्य आया सामने अस्पताल की जगह बनेगी केंटीन*
ब्यावर में नया होम्योपैथिक अस्पताल बनने की मंजूरी मिली हुई, वर्तमान में यह अस्पताल पिछले लगभग 25 से भी अधिक वर्षो से कभी किराये के कमरे में ओर फिलहाल चांदमल मोदी अस्पताल के परिसर में संचालित हो रहा है ।
यहां पर डॉक्टर विरेन्द्र रावत जून 2014 से अपनी सेवाएं दे रहे है और उनकी मेहनत और बेहतर उपचार की बदौलत ही यहां पर लगातार मरीजो को फायदा मिल रहा है जिस कारण यहां हमेशा पेशेंट बड़ी संख्या में आते है ।
यह डाक्टर रावत के होम्योपैथिक इलाज के प्रति लोगो मे विस्वास जगाने के कारण ही संभव हुवा है ।
आपकी जानकारी के लिए बता दु की इस अस्पताल के पास अपना खुद का भवन भी नही है इसलिए डाक्टर रावत अस्पताल में अपनी सेवाएं देने के अलावा अस्पताल का निजी भवन हो इस के लिए भी संघर्ष भी कर रहे है , जिस कारण उन्हें कई बार काफी परेशानी भी होती है ।
उनके प्रयासों से उन्होंने इसमे सफलता भी हासिल कर ली और उन्हें अस्पताल के लिए भूखंड आवंटन कर दिया गया ।
सरकार द्वारा जारी आदेश में अस्पताल के लिए 26 जून 2017 को होम्योपैथिक अस्पताल के भवन निर्माण के लिए स्थानीय अमृतकौर अस्पताल के पास एक भूखण्ड का आवंटन किया गया । इस के तहत तहसीलदार ने भूमि को 5 अक्टूबर 2017 को नगर परिषद ब्यावर को सौंप दिया गया ।
लेकिन इस परिषद ने आज तक होम्योपैथिक अस्पताल के लिए इस जमीन का कब्जा होमियोपैथी अस्पताल प्रबंधको को नही सम्भलाया ।
दूसरी तरफ अमृतकौर अस्पताल ने उस जमीन पर जो कि होम्योपैथिक अस्पताल के लिए आवंटित की जा चुकी है उस पर अवैध रूप से बिना आवंटन व प्रशासनिक अनुमति के अतिक्रमण कर केंटीन का निर्माण शुरू कर दिया । देखने वाली बात यह है की वह कौनसी ताकते है जो उक्त अस्पताल के आवंटित भूखण्ड पर जबरन केंटीन बनवाना चाहते है, क्या एक सरकारी महकमा किसी दूसरे सरकारी महकमे को आवंटित की गई जमीन पर कब्जा कर सकता है, जी नही यह जांच का विषय है कि इन सब के पीछे कौन है जो जनहित के कार्य के लिए आवंटित जमीन पर किन स्वार्थो के वसीभूत होकर होम्योपैथिक अस्पताल के लिए आवंटित जमीन पर केंटीन निर्माण करवाया रहे है ।
क्या शहर को अस्पताल की जगह केंटीन की ज्यादा जरूरत है ?
जबकि अस्पताल इलाके में केन्टीन पहले से ही संचालित है और अन्नपूर्णा रसोई वाहन भी प्रतिदिन आता है ।
लेकिन लगता है कि इस अस्पताल को अपना निजी भवन उपलब्ध होने में आने वाली अड़चनो को दूर करने में किसी को फुरसत नही है ।
नगर परिषद को चाहिए कि तुरंत केंटीन का अवैध निर्माण रुकवाए ओर होम्योपैथिक अस्पताल के लिए जमीन का कब्जा सौंपने की कार्यवाई करे ।
शहर के जनप्रतिनिधियों ,बुद्धि जीवियों ओर स्वयं सेवी संस्थाओं और सेवा संगठनों से कहना है कि होम्योपैथिक अस्पताल की जमीन के लिए भी संघर्ष करे ताकि समय पर भवन निर्माण हो सके और ब्यावर और उपखंड के लाखों मरीजो को होम्योपैथिक इलाज उपलब्ध हो सके ।
*हेमेन्द्र सोनी @ BDN जिला ब्यावर*

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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