ब्यावर से जुड़े कस्तूरी तस्करी के तार

ब्यावर से जुड़े कस्तूरी तस्करी के तार

शहरके मशहूर ईंट व्यवसायी भाजपा से जुड़े हरीश कुमावत काे कस्तूरी तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कुमावत को बुधवार रात सुमेरपुर थाना पुलिस ने दो अन्य आरोपियों के साथ 74 ग्राम कस्तूरी के साथ रंगेहाथों गिरफ्तार किया। कुमावत अपने एक रिश्तेदार ड्राइवर के साथ कस्तूरी की डिलीवरी देने जा रहे थे। पुलिस के मुताबिक कस्तूरी का सौदा बीस लाख में तय हुआ था और डिलीवरी सुंडा माता क्षेत्र में होनी थी। कई सामाजिक संगठनों के अध्यक्ष सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय कुमावत का यह चेहरा सामने आने के बाद नागरिक हैरान हैं।

गौरतलब है कि बुधवार को पाली जिले के सुमेरपुर थाना पुलिस ने पुराड़ा मार्ग पर नाकाबंदी के दौरान जालौर की तरफ जा रही कार को रोककर विलुप्त प्रजाति के कस्तूरी मृग की नाभि से निकाली जाने वाली दुर्लभ कस्तूरी बरामद कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपियों में डिग्गी निवासी हरीश कुमावत पुत्र विष्णु कुमावत, पीपलिया कलां निवासी हंसराज पुत्र भीकमचंद तथा गई कस्तूरी का वजन 74 ग्राम है। पकड़े गए अन्य दो आरोपियों पिपलिया कलां निवासी हंसराज अौर ब्यावर निवासी ड्राइवर हाकिम पुत्र मानजी शामिल हैं। अारोपियों ने पुलिस के सामने स्वीकार किया कि इस कस्तूरी का सौदा 61 लाख रुपए से शुरू हुआ था। जो कि बाद में 20 लाख रुपए में तय हुआ। फिलहाल आरोपियों को पुलिस ने तीन दिन के रिमांड पर लिया है। रिमांड के दौरान बड़े गिरोह का खुलासा होने की उम्मीद है।

असलीया नकली जांच में होगा खुलासा

पकड़ेगए आरोपियों के पास से पुलिस ने जो कस्तूरी बरामद की है वह असली है या नहीं इसकी जांच के लिए इसका सैंपल देहरादून हैदराबाद की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में भेजा गया है।

अंतरराष्ट्रीयबाजार में कीमत

कस्तूरीसोने से भी अधिक महंगी होती है। कस्तूरी की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ी मांग है। एशिया के पर्वतों में कभी सैकड़ों कस्तूरी मृग हुआ करते थे। अफगानिस्तान, भूटान, वर्मा, चीन, कोरिया, पाकिस्तान, रूस एवं भारत में हिमालय पर्वत समेत अन्य इलाकों में कस्तूरी मृगों की पांच प्रजातियां अब भी अस्तित्व में हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 50 हजार डालर प्रति सौ ग्राम इसकी कीमत बताई जाती है। पकड़े गए आरोपियों ने 74 ग्राम कस्तूरी 20 लाख रुपए में खरीदी। इस हिसाब ये यह लगभग ढाई करोड़ रुपए प्रति किलो से ऊपर के भाव हो गई।

रेडडाटा बुक में शामिल है कस्तूरी मृग

कस्तूरीमृगों के अस्तित्व के गंभीर खतरे को देखते हुए इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर एंड नेचुरल रिसोर्सेज ने इन्हें रेड डाटा बुक में शामिल किया हुआ है। भारत सरकार ने वन्य जंतु संरक्षण अधिनियम के तहत इनके शिकार पर सन 1972 में रोक लगाकर कानून बनाया गया था।

क्या होती है कस्तूरी

कस्तूरीअंडाकार थैली में कस्तूरी मृग में द्रव्य के रूप में मिलती है। इसका रंग चॉकलेटी होता है। इसे सुखाकर इस्तेमाल किया जाता है। इसी कस्तूरी के कारण शिकारियों के हाथों नर और मादा कस्तूरी मृग दोनों ही मारे जाते हैं, लेकिन कस्तूरी केवल वयस्क नर से ही प्राप्त होती है। वह भी सैकड़ों में किसी एक से। एक मृग से सामान्यता एक बार में 30 से 45 ग्राम तक कस्तूरी प्राप्त की जा सकती है। बेहद खुशबूदार होने के कारण यह इत्र बनाने के काम आती है। इसके अलावा दमा, मिर्गी, हिस्टीरिया, निमोनिया, टाइफाइड एवं दिल की करीब सौ से अधिक दवाइयां बनाने के काम आती है।

सुमेरपुर पुलिस गिरफ्त में आरोपी। (गोले में हरीश कुमावत)

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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