अगले 24 घंटे नही मिलेगी जीवन रक्षक दवा, दवा विक्रेता बने मरीजो की जान के दुश्मन, अपने कमीशन के लालच में मरीजो की जान लगा देंगे दाव पर

अगले 24 घंटे नही मिलेगी जीवन रक्षक दवा, दवा विक्रेता बने मरीजो की जान के दुश्मन, अपने कमीशन के लालच में मरीजो की जान लगा देंगे दाव पर

BDN
अगले 24 घंटे नही मिलेगी जीवन रक्षक दवा
दवा 💊विक्रेता बने मरीजो की जान के दुश्मन
अपने कमीशन के लालच में मरीजो की जान लगा देंगे दाव पर 💉
सरकार तय करे दवा विक्रेताओ की हड़ताल के दौरान होने वाली मोत की जिम्मेदारी
ऑनलाइन बिकने वाली दवाओं पर प्रतिवंध लगाने की मांग को लेकर देश के दवा विक्रेताओ द्वारा 28 सितंवर को की जा रही देश व्यापी हड़ताल ।
इससे देश भर में करोड़ो मरीजो को , प्रसूताओं को, एवं दुर्घटना में घायल होने वाले मरीजो जिन्हें तुरन्त जीवन रक्षक दवाओ की आवश्यकता होगी, एक मिनट की देरी भी उनकी जान पर भारी होगी, वह अगले 24 घण्टे नही मिल पाएगी ।
ऐसे में पूरे देश के दवा विक्रेताओ द्वारा पूरे 24 घंटे की हड़ताल से पूरे देश मे मरीजो ओर उनके परिवार में कोहराम मच सकता है ।
देखा जाए तो दवा विक्रेताओ को हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योकि इस दवा के व्यापार में उनके मोटे कमीशन की पोल जो खुलने लगी थी । इससे घबराकर उनको अपने संगठनों की आड़ में हड़ताल जैसा कदम उठाना पड़ा ।
आज जब कमोबेश हर क्षेत्र में हर प्रकार के छोटे बड़े सामान ओर अन्य वस्तुओ की पूरी दुनिया मे ऑन लाइन बिक्री हो रही है जिससे व्यापार में पारदर्शिता बढ़ने लगी और उच्च गुणवत्ता का सामान घर बैठे मिलने लगा । जिस कारण उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ होने लगा, समय बचने लगा और उच्च गुवत्ता का सामना मिलने से उपभोक्ता में ऑन लाइन खरीददारी के प्रति रुचि बढने लगी है ।
पूरी दुनिया जानती है कि दवा कम्पनियो ओर अस्पतालों की साठ गांठ से उपभोक्ताओ को वास्तविक कीमत से ज्यादा पैसा देकर दवा खरीदनी पड़ती है ।
कई बार तो यह राशि कई गुना तक हो जाती है । जबकि ऑनलाइन खरीददारी में फ्री होम डिलीवरी ओर 15 से 25 प्रतिशत डिस्काउंट तक मिलता है ।
इस वजह से रिटेल दवा विक्रेताओ का व्यापार प्रभावित होने लगा था उनको मिलने वाले मोटे कमीशन की पोल खुलने लगी थी । जो कि हड़ताल पर जाने की एक मात्र मजबूरी है ।
कई बार देखा गया है कि एक ही इलाज की एक जैसी दवा अलग अलग दर पर बिक रही है, जबकि उनके साल्ट लगभग एक जैसे होते है, यह सब डाक्टरो ओर मेडिकल स्टोर को दवा कंपनियों के द्वारा दिये जाने वाले मोटे कमीशन के कारण होता है, दवा कंपनियां डाक्टर को मोटे कमीशन का लालच देकर अपनी ब्रांड की दवाई मरीजो को लिखने के लिए प्रोत्साहित करती है, यह बात किसी से छिपी हुई नही है ।
इसी कारण सरकार इन दवा विक्रेताओ की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए ऑनलाइन दवा बिक्री को प्रोत्साहित कर रही है ।
सरकार को चाहिए कि इस हड़ताल की वजह से मरीजो को होने वाले नुकसान ओर यदि दवा के अभाव में देश मे कही भी किसी मरीज की मौत होती है तो उसकी जिम्मेदारी तय कर उन्हें उसका दंड देना निश्चित करे ।
सोचने वाली बात:- 👇
यदि दवा विक्रेताओ की हड़ताल के दौरान उनके परिवार में भाई, बहन, माँ, पिता, या रिश्तेदारी में किसी की डिलिवरी, किसी की दुर्घटना, किसी को हार्ट अटैक, किसी को ब्रेन हेमरेज या कोई अन्य तकलीफ हो जाएगी तो क्या वो उस हड़ताल में उन्हें दवाई उपलब्ध कराएगा या नही ???
यदि अपने परिवार के लिए आप चिंतित है तो किसी अन्य के परिवार में होने वाली परेशानी या मोत के जिम्मेदार आप क्यो बनना चाहते है। एक बार सोचो मनन करो ।
💊💉 इसी लिए दवाओं को जीवन रक्षक कहा जाता है 💉💊
कमीशन तो कम ज्यादा होता रहता है, लेकिन जिंदगी अनमोल है एक बार हाथ से निकली तो दुबारा नही मिलेगी ।
कमीशन के खेल में मरीज की जान दांव पर मत लगाओ
हेमेन्द्र सोनी @ BDN जिला ब्यावर

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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