ब्यावर की झलकिया

ब्यावर की झलकिया

लगते हैं सबको प्यारे टेऊंराम

प्रेमप्रकाश आश्रम में मनाया जन्मोत्सव : भक्तोंने 129 व्यंजनों का लगाया भाेग

भास्करन्यूज | ब्यावर

श्रीप्रेमप्रकाश मंडलाचार्य सत्गुरू स्वामी टेऊंराम महाराज के 129वें जन्मोत्सव पर प्रेमप्रकाश आश्रम में स्वामी टेऊंराम की प्रतिमा के समक्ष 129 व्यंजनों का महाभोग लगाया गया। साथ ही सुबह 11 बजे कन्या भोज का आयोजन किया गया।

प्रेमप्रकाश पंथ के अनुयायियों द्वारा घर पर निर्मित विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया गया। प्रेमप्रकाश आश्रम के संत हिमांशु महाराज ने सत्संग के दौरान कहा कि किसी भी संत-महापुरूष का नाम ऐसे ही नहीं याद किया जाता। अवश्य ही उन्होंने जनहित के लिए ऐसे कार्य किए होते हैं जिनमें मनुष्यों का जीवन सफल हो सके। संत ने भली-भली थो करे सब भली रे, दिल घबराए नपा, मन से मुंझाए ना… लगते है सबको प्यारे-प्यारे सतगुरू टेऊंराम हमारे…भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। इससे पहले नानकराम ने हम सब सतगुरू टेऊंराम की महिमा गाते रहे हैं, गाते रहेंगे, शीश को हम सब झुकाते रहे हैं झुकाते रहेंगे…भजन प्रस्तुत किया। आश्रम में प्रतिदिन लता पुरूस्वानी, इंद्रा लालवानी, गंगा दादी, आशा देवनानी, बालिका मंडली की नीतू, पायल, वर्षा, लता, नेहा, रीना, रेशमा आदि द्वारा भजन, जन्म साखी तथा प्रेमप्रकाश ग्रंथ श्रीमद् भागवत के पाठों का पठन किया जा रहा है।

आजहोगी आतिशबाजी

मंगलवारको सत्गुरू टेऊंराम महाराज के जन्मोत्सव पर दीप प्रज्जवलन, शहनाई वादन तथा आतिशबाजी होगी। इसके बाद शाही भंडारे का आयोजन किया जाएगा। जन्मोत्सव की व्यवस्था सुंदर वासवानी, भगवान दरयानी, दयाल प्रियानी, भगवान सेवानी, हरीश देवानी, सुगनामल वरजानी, गोपाल, कपिल, नरेश, नरेंद्र, उधवदास समेत अन्य ने संभाल रखी है।

अमृतकौर अस्पताल के दवा स्टोर की व्यवस्थाएं गड़बड़ाई

राजकीयअमृतकौर अस्पताल का दवा सेंटर अव्यवस्थाओं का शिकार हो रहा है। कुछ अर्से से अमृतकौर अस्पताल प्रबंधन की बेपरवाही के कारण ना सिर्फ स्टोर में दवाओं की संख्या में कमी रही है बल्कि संचालन और दवा वितरण में भी खामियां सामने आने लगी है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम ये है कि एक ओर जहां स्टाफ की कमी के चलते नई भर्तियों की मांग उठाई जा रही है तो वहीं दूसरी और सब स्टोर से लगातार कर्मचारियों की संख्या में कटौती की जा रही है।

अस्पताल प्रबंधन ने कुछ महीनों पहले स्टोर में कार्यरत कर्मचारी नरेंद्र नोगिया को हटा दिया गया। एकेएच के सब स्टोर में दवा वितरण और सप्लाई में सालों से काम कर रहे कर्मचारी देवेंद्र कुमार छीपा को भी यहां से हटा कर ऑपरेशन थिएटर में लगा दिया गया। इससे स्टोर से दवा सप्लाई का काम प्रभावित हुआ।

एंबुलेंस में दिया बच्चे को जन्म

ब्यावर | समीपवर्तीग्राम सोडपुरा निवासी एक महिला का प्रसव सोमवार को एंबुलेंस में हो गया। जच्चा और बच्चा दोनों की स्थिति सामान्य है। जानकारी के अनुसार सोडपुरा निवासी मदीना(25) प|ी किशन काठात के प्रसव पीड़ा होने के कारण परिजनों ने 108 पर कॉल किया। मौके पर पहुंचे कर्मचारी मदीना को लेकर अमृतकौर के लिए रवाना हुए। रास्ते में प्रसव पीड़ा ज्यादा होने लगी। अमृतकौर अस्पताल के समीप एंबुलेंस में ही मदीना ने नवजात को जन्म दे दिया। कर्मचारियों ने दोनों को एकेएच में भर्ती करवाया गया है।

डांगावास मामले में जताया रोष

ब्यावर| डांगावासदलित हत्याकांड संघर्ष समिति ने अब तक मामले में सरकार पर गंभीरता नहीं बरतने का आरोप लगाया। प्रदेश महासचिव भंवरसिंह भियावत ने कहा कि अजमेर जेएलएन अस्पताल के बाहर अनुसूचित जाति के लोगों ने दो बार आंदोलन किया। साथ ही समिति ने 18 सूत्री मांग पत्र भी राज्य सरकार को सौंपा। मगर अब तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

शहर में स्थापित हो महापुरुषों की प्रतिमा

नगरमें निर्मित महापुरूषों के सर्किल का जीर्णोद्वार करने और नए सर्किल के निर्माण के संबंध में शिवसेना पदाधिकारियों ने आयुक्त और सभापति को ज्ञापन सौंपा। जिसमें उन्होंने शहर में छत्रपति शिवाजी, बाल गंगाधर तिलक, भगतसिंह, सरदार वल्लभ भाई पटेल, झांकी की रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा और सर्किल निर्माण कराने की मांग की। शिव सेना प्रदेश सचिव सुरेश चौहान ने बताया कि सोमवार को आयोजित जीसी में सदन में इस संबंध में भी प्रस्ताव पर चर्चा हुई। उन्होंने मेवाड़ी गेट स्थित महाराणा प्रताप सर्किल का जीर्णोद्वार कराने, अजमेरी गेट बाहर स्थित नेताजी सुभाष सर्किल का जीर्णोद्वार, सुभाष उद्यान में छत्रपति शिवाजी, भगतसिंह, बाल गंगाधर तिलक, सरदार वल्लभ भाई पटेल, झांकी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे राष्ट्र पुरूशों की प्रतिमा की स्थापना करने की मांग की। साथ ही रेलवे स्टेशन के बाहर सिटी सिनेमा के पास निर्मित सर्किल पर छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा स्थापित करने की मांग की

नशे से मुक्त हो गए, दवाएं नदारद

 

नशेसे मुक्ति के लिए मरीजों को ट्रॉमाडोल, क्लानिडीन, लॉराजीपॉम जैसी दवाएं मरीजों को नहीं मिल रही है। डॉक्टरों के अनुसार नशे से मुक्ति पाने का प्रयास कर रहे मरीज के लिए क्लोनिडीन टेबलेट बेहद जरूरी है। अफीम के आदि व्यक्ति को नशा नहीं मिलने पर शरीर में बेचैनी होने लगती है। ऐसे में उसके लिए क्लोनिडीन टेबलेट से ही मरीज को राहत मिल सकती है।

भास्कर न्यूज| ब्यावर

प्रदेशसरकार द्वारा 2016 में डोडा पोस्त के ठेकों को बंद करने की नीति के तहत नशा मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत डोडे के नशे के एडिक्ट को दवाओं के माध्यम से नशे से मुक्ति दिलवाने के लिए नशे से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन नशा मुक्ति शिविर में रजिस्ट्रेशन करवाने वाले 192 मरीजाें को शिविर के बाद से अस्पताल में दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में उन मरीजों के सामने नशे से मुक्ति पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। इतना ही नहीं कई मरीजों को बाहर से महंगी दरों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। ऐसे में निशुल्क दवा योजना इन मरीजों के लिए बेमानी साबित हो रही है।

शरीरमें होने लगता है कंपन

विशेषज्ञोंके अनुसार अफीम, डोडे और पोस्त के नशे के आदि को अगर नशा नहीं मिले तो उसके शरीर में बहुत ज्यादा कमजोरी होने लगती है। नशा नहीं मिलने पर नशे के आदि के शरीर में कंपन होने लगता है और उसका ब्लड़ प्रेशर बढ़ने लगता है और पसीने के साथ घबराहट होने लगती है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर समय पर और पूरा इलाज मिले तो एडिक्ट को भी नशे से मुक्ति मिल सकती है।

सिर्फकैंप में मिली दवाएं

शिविरमें इलाज करवाने के लिए रजिस्टर्ड हुए एक मरीज ने बताया कि शिविर में नशा मुक्ति को लेकर बड़े बड़े दावे किए गए। शिविर के दौरान उन्हें आश्वासन दिया गया कि शिविर के बाद भी अस्पताल में उन्हें नशा मुक्ति दवाएं उपलब्ध होंगी। लेकिन शिविर के बाद दवाओं के लिए अस्पताल के चक्कर का काट रहे हैं दवाएं नहीं मिल रही है।

मिलसकती है नशे से मुक्ति

डॉक्टरोंने बताया कि मरीज अगर चाहे तो उसे अपनी नशे की आदत से मुक्ति मिल सकती है। बस उसे दृढ़निश्चय करना होगा और संयम रखना होगा। डॉक्टरों ने बताया कि अगर डीएडिक्शन सेंटर पर शिविर के दौरान मरीजों काे बुप्रेनॉरफिन टेबलेट दी जाए तो एक ही टेबलेट से मरीज को नशे की लत से छुटकारा मिल सकता है। बस शिविर के दौरान ये टेबलेट दी जाए और बाद में ट्रॉमाडोल, क्लानिडीन, लॉराजीपॉम से भी नशे की लत से छुटकारा मिल सकता है।

^नशेके एडिक्ट मरीज को कम से कम तीन से चार माह लगातार दवाएं दी जानी चाहिए। लगातार दवाएं दे कर दवाओं की मात्रा कम करते रहने से दी नशे की लत से छुटकारा मिल सकता है। हां ये सही है कि एडिक्शन की कुछ दवाएं अस्पताल से नहीं मिल रही है। अगर लगातार और पूरी दवाएं नहीं मिले तो शिविर का लाभ नहीं मिल पाएगा। डॉ.दिनेश जैन, मानसिक रोग विशेषज्ञ, अमृतकौर अस्पताल |

तदर्थ समिति का गठन

ब्यावर| आमआदमी पार्टी की शहर एवं ग्रामीण कार्यकारिणी की तदर्थ समिति एवं विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रभारियों वार्ड प्रभारियों की घोषणा की गई।

ब्यावर शहर प्रभारी के लिए नीलेश बुरड़ गुलाबचंद शर्मा और ग्रामीण क्षेत्र के लिए मनजीत सिंह हुडा घेवरचंद प्रजापति को प्रभारी का दायित्व सौंपा गया। पार्टी के आईटी प्रकोष्ठ के लिए नीलेश बुरड़ को प्रभारी और महेश शर्मा, विनोद गर्ग को सह प्रभारी, व्यापार प्रकोष्ठ प्रभारी राधावल्लभ माहेश्वरी, लीगल प्रकोष्ठ के लिए एडवोकेट रामपाल कुमावत, एडवोकेट पारसमल श्रीश्रीमाल को जिम्मेदारी सौंपी गई।

सांवलिया सेठ मंदिर में झांकी दर्शन

ब्यावर| शहरमें भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के बाद देलवाड़ा रोड स्थित सांवलिया सेठ मंदिर में दस दिनों के लिए विराजित भगवान जगन्नाथ, बलभद्र सुभद्रा की मूर्ति का सोमवार को विशेष श्रृंगार किया गया। प्रवक्ता प्रवीण मोयल के अनुसार दस दिनों तक मंदिर परिसर में विशेष श्रृंगार करने के साथ झांकियों का आयोजन किया जा रहा है। सोमवार को बड़ी संख्या में भक्तों ने वहां पहुंच कर दर्शन किए। पं.दीपक गौड ने बताया कि आगामी दिनों में झांकियों के अलावा फूल बंगला, श्री बालगोपाल वन महोत्सव, अभिषेक इत्यादि कार्यक्रम के आयोजन होंगे।

 

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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