*BDN* *फायर अधिकारियों ने जांची कोचिंग सेंटर व अन्य की सुरक्षा व्यवस्था*

*BDN* *फायर अधिकारियों ने जांची कोचिंग सेंटर व अन्य की सुरक्षा व्यवस्था*

BDN फायर अधिकारियों ने जांची कोचिंग सेंटर व अन्य की सुरक्षा व्यवस्था फायर ब्रिगेड डिपार्टमेंट खुद कितना है सक्षम इसकी जांच कोन करेगा? ब्यावर- सूरत में कोचिंग सेंटर में हुए हादसे के बाद ब्यावर शहर में भी फायर अधिकारियो ने शहर के विभिन्न कोचिंग सेंटरो ओर अन्य जगहों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर आवश्यक उपाय सुनिश्चित करने को कहा । यह बहुत ही अच्छी बात है । किंतु क्या कोई यह बताएगा कि शहर का फायर ब्रिगेड विभाग खुद कितना चुस्त दुरस्त है, उसके पास उपलब्ध संसाधन कितने कारगर है, उनके पास उपलब्ध साधनों से वो मुसीबत के समय सुरक्षा दिलाने या आम जनता का जीवन बचाने में कितने कारगर साबित होंगे, क्या फायर अधिकारियों और कर्मचारियों के पास दुर्घटना से निपटने के लिए ओर खुद की ओर जनता की जान बचाने के लिये पर्याप्त संसाधन है कि नही, उनके पास उपलब्ध वाहनों की कार्यकुशलता कितनी है, ओर वो कितने पुराने है इसकी जांच किसी ने की है, शहर में कई बड़ी बड़ी इंडस्ट्रीया है उनमें बड़ी संख्या में मजदूर ओर अन्य लोग कार्य करते है वहा केमिकल, पेट्रोल, गैस या अन्य कोई कारण से बड़ी दुर्घटना हो जाती है तो उनसे निपटने में वो कितने सक्षम है, व्यावर के फायर फाइटर ओर उनके संसाधन । बढ़ती आबादी ओर बढ़ता शहर का दायरा ओर ब्यावर में उपलब्ध अग्निशमन कर्मचारी ओर संसाधन क्या पर्याप्त है ? क्या कभी किसी जिम्मेदार ओर जनप्रतिनिधि ने शहर की इस समस्या पर सोचा है शहर में 10/ 12 मीटर से भी बड़ी बड़ी बिल्डिंगे, ओर मॉल बने हुए है शहर की सकड़ी गलियों में बने बड़े बड़े मार्केट और नित नए बनने वाले शॉपिंग मॉल आदि उन बड़ी बड़ी इमारतों में दुर्घटना के समय जान माल को बचाने के लिए कितने साधन है शहर के फायर डिपार्टमेंट के पास क्या कोई इनकी भी जांच करेगा । दुर्घटना होने पर क्या शहर की संकड़ी गलियों में ब्यावर का फायर डिपार्टमेंट पहुच पायेगा । शहर में बढ़ते अतिक्रमण, ओर बेतरतीब पार्किंग की बदौलत आसानी है दुर्घटना स्थल तक पहुच पाएंगे ?? शहर की संकड़ी गलियों में दुर्घटना होने पर कैसे निपटेगा फायर विभाग?? क्या किसी प्रशासनिक अधिकारी ने इसके लिए मॉक ड्रिल की सोची है । क्या कोई इनको पर्याप्त साधन ओर सुरक्षा मुहैया कराने के लिए प्रयास करेगा । या केवल खानापूर्ति करने के लिए आम जनता के परिसरों पर जांच कर इति श्री कर ली जाएगी । ओर बाद भी कोई बड़ी दुर्घटना होने पर संसाधनों का रोना रोया जाएगा । शहर में कुमावत भवन गैस दुखांतिका को लोग भूल नही है और उन्हें यह भी याद है कि किस तरह राहत कार्य को अंजाम दिया गया जिस कारण मृतकों की संख्या में इजाफा हुवा था । अभी कुछ दिन पहले ही लोढा कालोनी के एक मकान के पोर्च में खड़े वाहनों में आग लग गई थी और फायर ब्रिगेड 45 मिनट से भी ज्यादा देरी से पहुची थी तब तक वहां सब कुछ जल कर राख हो गया था । ये तो तब हुवा जब रात्रि में बाजार सब सुनसान थे और पूरा बाजार और सभी रास्ते खाली थे तब अग्निशमन को पहुचने में 45 मिनट लगे थे जबकि रास्ता 10 मिनट से ज्यादा का नही था । इससे पता चलता है कि ब्यावर अग्निशमन की कार्यकुशलता का । हेमेन्द्र सोनी @ BDN जिला ब्यावर

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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