चीन के CFL पर सख्‍ती ने घरेलू इंडस्‍ट्री को दिया पावर, कंपोनेंट इंडस्‍ट्री के लिए मौका

चीन के CFL पर सख्‍ती ने घरेलू इंडस्‍ट्री को दिया पावर, कंपोनेंट इंडस्‍ट्री के लिए मौका
नई दिल्ली। चीन और वियतनाम से सस्ते आयात की मार झेल रही भारतीय लाइटिंग इंडस्‍ट्री को एंटी डंपिंग ड्यूटी की ‘पावर’ मिल गई है। सरकार ने चीन से सीएफएल (कॉम्पैक्ट फ्लोरोसेंट लैंप) आयात पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा दी है। इस फैसले देश में सीएफएल बनाने वाली उन छोटी इकाइयों को बड़ी राहत मिली है, जो कि इंडस्ट्रियल सप्लाई और रूरल मार्केट में चीनी प्रभुत्व के चलते मंदी की मार झेल रही हैं। कारोबारियों के अनुसार सरकार द्वारा आयात पर डंपिंग ड्यूटी लगाने के बाद चीनी सीएफएल 20 से 25 फीसदी महंगी हो जाएंगी। जिससे घरेलू छोटी इंडस्‍ट्री को चीन से टक्‍कर लेने में मदद मिलेगी। वहीं कंपोनेंट सप्लायर्स और एसेंबलिंग इकाइयों के लिए भी नए कारोबारी मौके बनेंगे।
क्वालिटी पर खत्‍म होगा प्राइस का दबदबा
फिरोजाबाद स्थित स्पार्क लाइटिंग सॉल्यूशन के मैनेजिंग डायरेक्‍टर विक्रांत कुमार गुप्‍ता के अनुसार क्वालिटी के पैमाने पर भारत में निर्मित सीएफएल कहीं बेहतर है। लेकिन इंडस्‍ट्री के लिए सबसे बड़ी समस्या कीमत को लेकर है। चीन निर्मित सीएफएल बल्ब की कीमत भारत के मुकाबले 20 से 25 फीसदी सस्ती बैठती है। यही कारण है कि इंडस्ट्रियल सप्लाई में अधिकतर चीनी सीएफएल बल्ब का उपयोग किया जाता है। इंडस्‍ट्री की डिमांड पर गौर करते हुए सरकार ने 26 वॉट वाली सीएफएल बल्ब पर 0.302 डॉलर प्रति नग के हिसाब से ड्यूटी लगा दी है। इससे कीमत का अंतर कम होगा। जिससे चीन और भारत की इंडस्‍ट्री के लिए भारतीय बाजार में लेवल प्लेइंग फील्‍ड तैयार होगी। जिसका फायदा भारतीय इंडस्‍ट्री को मिलेगा।
रूरल और इंडस्ट्रियल सप्लाई में होगा कंपटीशन
नोएडा की लाइट हाउस इंडस्‍ट्री के नेशनल सेल्स हैड दिव्यांक गोयल बताते हैं कि चीन से आयातित सीएफएल पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाए जाने से छोटी इकाइयों के लिए कंपटीशन में खड़ा होना आसान हो जाएगा। छोटी सीएफएल इकाइयां बड़ी कंपनियों को प्रोड्क्ट सप्लाई करती हैं। यहां कीमत में अंतर के चलते चीनी कंपनियां बाजी मार ले जाती हैं। चूंकि अब कीमत में अंतर कम हो जाएगा, तो भारतीय कंपनियों को भी प्रोड्क्ट बेचना आसान हो जाएगा। इसके अलावा भारतीय निर्माताओं को अपने प्रोड्क्ट ग्रामीण और छोटे शहरों में बेचना आसान हो जाएगा। जहां फिलहाल चीन की हिस्‍सेदारी 50 फीसदी से ज्‍यादा है।
कंपोनेंट और एसेंबलिंग में कारोबारी मौके
मोहाली के सीएफएल निर्माता विक्रम चोपड़ा बताते हैं कि चीन की सस्ती सीएफएल के सामने हथियार डाल चुकी लोकल इंडस्‍ट्री को डंपिंग ड्यूटी के साथ एक बार फिर खड़ा होने का मौका मिलेगा। इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ने से कंपोनेंट सप्लाई और एसेंबलिंग से जुड़ी इंडस्‍ट्री को भी फायदा होगा। मुंबई के इलेक्ट्रिक प्रोडक्ट सप्लायर डीआर शहाणे बताते हैं कि मार्केट में चीनी प्रोडक्ट के कब्जे के चलते बहुत सी छोटी इंडस्‍ट्री या तो बंद हो गई थीं। या फिर वहां उत्पाद घटकर आधा रह गया था। अब उत्पादन में रफ्तार आने से सीएफएल बनाने वाली छोटी यूनिटों को नए कारोबारी मौके मिलेंगे, वहीं बंद हो चुकी इकाइयों के लिए भी दोबारा यूनिट शुरू करने का मौका है।
सीएफएल उत्पादन बढ़ाने पर जोर
फिरोजाबाद में इलेक्ट्रिक बल्ब बनाने वाली कंपनी ओरोरा लाइट्स के डायरेक्‍टर सलीम खान के अनुसार सस्ता होने के चलते भारत में अभी भी एलईडी के मुकाबले सीएफएल की डिमांड ज्‍यादा है, वहीं सामान्य बल्ब के मुकाबले यह एक चौथाई बिजली की खपत करता है। लेकिन मार्केट में चीनी कंपनियों के दबदबे के कारण सीएफएल निर्माण अब फायदे का सौदा नहीं रह गया है। वहीं पिछले दो तीन साल से एलईडी का प्रचलन बढ़ रहा है। जिसके चलते बहुत से सीएफएल और बल्ब निर्माता एलईडी की ओर मुड़ चुके हैं। अब प्रतियोगी माहौल को देखते हुए इंडस्‍ट्री दोबारा सीएफएल की ओर मुडनें की तैयार कर रही है।

 

कंपोनेंट पर चीनी निर्भरता बढ़ाएगी मुश्किल
फरीदाबाद की मिंट एल्‍युमस के प्रोडक्‍ट हेड साबिर अली बताते हैं कि सीएफएल में उपयोग आने वाले 80 फीसदी फ्लोरोसेंट ग्‍लास ट्यूट, चिप बोर्ड और दूसरे प्रॉडक्‍ट चीन, थाईलेंड और वियतनाम से आते हैं। हालांकि भारत में फिरोजाबाद में ग्‍लास ट्यूब और मुंबई, कोयंबटूर, गुवाहाटी, कोलकाता, दिल्‍ली में भी इंडस्‍ट्री कंपोनेंट निर्माता तैयार हो रहे हैं, लेकिन फिर भी इंडस्‍ट्री पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। अब यदि चीन सरकार भी लोकल इंडस्‍ट्री को बचाने के लिए रॉ मटेरियल पर ड्यूटी बढ़ाती है तो इससे भारतीय इंडस्‍ट्री पर दोहरी मार पड़नी तय है।

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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