क्या ब्यावर 18वीं सदी में जा रहा है???

क्या ब्यावर 18वीं सदी में जा रहा है???

*BDN*
*क्या ब्यावर 18वीं सदी में जा रहा है???*
जी हां बात जरूर अटपटी है, ओर किसी के भी गले नही उतरेगी, लेकिन वरिष्ठ पत्रकार विमल चौहान ने लिखा है कि *देश 21 वीं सदी में ओर ब्यावर 18वी सदी में जी रहा है*
उसी लेख से लिये कुछ अंश के साथ मे मेरी विवेचना ।
पिछले कुछ वर्षों से ब्यावर का पिछड़ापन देख कर ओर विकास के नाम पर मिली आपसी राजनीतिक द्वेषता, भ्रस्टाचार का चरम पर होना, नेताओ की आपसी फूट, इच्छा शक्ति की कमी देख कर लगता है कि ब्यावर वास्तव में 18वीं सदी में जा रहा है ।
विकास कैसा हो रहा है, किसका हो रहा है, ओर क्यो हो रहा है, सभी जानते है, लेकिन मुंह खोलने का साहस किसी मे नही है चाहे वो सत्ता पक्ष के हो या विपक्ष के क्योकि एक बात जग जाहिर है कि अपना काम हो बनता, तो भाड़ में जाये जनता । सबको स्वार्थ के आगे कुछ दिखाई नही दे रहा है, आम जनता की तो बिशात ही कहा जो मुंह खोले, शहर के बाशिन्दे मर मर कर जी रहे है, सत्ता का नशा इस कदर हावी है कि शहर की दुर्गति और भविष्य का विनाश दिखाई नही दे रहा है ।
सीवरेज लाइनों के नाम पर आधा शहर खोद डाला, मररमत के नाम पर जीरो, अमृत योजना के नाम पर शहर की सारी गलिया ओर सड़के खोद डाली, मरममत के नाम पर लीपा पोती, और केबल के नाम पर बार बार जख्मी होता हाइवे, ओर जिसकी मिट्टी, गिट्टी, कंक्रीट आदि सड़को पर बिखरती है और यातायात को प्रभावित करती है, जिसकी साफ सफाई तक समय पर नही होती ।
भ्रस्टाचार के मामले में सर्व सुविधा उक्त कार्यप्रणाली उपलब्ध है, अन्यथा कोई जायज काम का सोच कर भी देखे क्या हश्र होता है, शहर में सफाई कर्मी भर्ती घोटाला, दुकानों और काम्पलेक्सो के अवैध निर्माण के मामले, कालोनियों के पट्टे ओर नक्शे पारित करने में घोटाले, रोशनी व्यवस्था में भर्ष्टाचार आदि कई और भी लिस्ट है ।
शहर का विकास तो तब होगा जब जन प्रतिनिधि ओर नेता अपने विकास से निजात पा ले ।
स्टेडियम का विकास ना जाने कहा खो गया, गौरव पथ कछुए की चाल से चल रहा है,
चुनावी समर में रानीखेत आखिर रुकी, श्रेय लेने की मची होड़, प्रथम ठहराव की फोटो खिंचवाने के मची होड़, दूल्हे ज्यादा बाराती कम नजर आए । जैसे रानी खेत का रुकना ही विकास है । सांसद महोदय को इस बहाने आना पड़ा अपने कार्यकाल में कितनी बार आये कुल मात्र 6 बार, जिसमे भी रेलवे स्टेशन के लोग मोहल्ले की गंदगी की शिकायत कर बैठे, जो कि नेताओ को नागवार गुजरा । कैसे होगा शहर का विकास, ब्यावर में सांसद निधि से कितने कार्य हुए हम सब जानते है,
पार्षद की आत्मदाह की धमकी, सदन में पार्षदों की आपसी मार पिटाई किसी से छिपी नही है । पार्षदों के खुद के काम भी समय पर नही होते । रातो रात निजि कम्पनियो के टावर खड़े हो जाते है । जलदाय विभाग पानी की सप्लाई नियमित करने में अपने आपको असहाय समझ रहा है, इन सब के बाद भी किसी भी विभाग को ओर नेता को अपने विभाग के उच्चाधिकारियों का और अपने आकाओं का कोई भय नही, सब के सब बेलगाम हो रहे है किसी को कोई भय नही है ।
परेशान जनता ने पटवारी को 50000 की रिश्वत लेते है रंगे हाथों पकड़ा कर अपनी भड़ास निकाली । लेकिन भ्रष्टाचार से ग्रस्त परिषद पर ACB की नजर अभी तक नही पड़ी है । सब प्रभु की इच्छा है ।
निजी स्कूलों की फिस की मनमानी से अभिभावक आकंठ तक डूबे है लेकिन शिक्षा विभाग चैन की बंशी बजा रहा है ।
स्टाफ के अभाव में शहर में जगह जगह लगने वाले जाम ओर ठेले वालो की रेलम पैल, के कारण शहर की यातायात व्यवस्था का भी भगवान ही मालिक है, व्यापारियों का अतिक्रमण, बेतरतीब पार्किंग, ओर बढ़ता यातायात जनता को रेंगने को मजबूर कर रहे है ।
कलेक्टर महोदय को दौरा कर जनता का दुख दर्द सुनने की फुरसत नही है । जब कलेक्टर चार वर्ष में 3 बार ओर सांसद 6 बार आएंगे तो विकास की समीक्षा केसे होगी ।
लोकायुक्त के आदेशों की अनुपालना की जरूरत ही नही है ।
*हेमेन्द्र सोनी @ BDN जिला ब्यावर*

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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