याज फिर रुलाने की तैयारी में, दाम में हो सकता है 10 से 15 फीसदी इजाफा

याज फिर रुलाने की तैयारी में, दाम में हो सकता है 10 से 15 फीसदी इजाफा

नई दिल्ली- प्याज के उपभोक्ताओं के लिए एक बुरी खबर है। खुदरा महंगाई के जून में बढ़कर 5.40 प्रतिशत पर पहुंचने और असमय वर्षा से फसलों को हुए नुकसान के कारण प्याज की कीमतों में 10 से 15 फीसदी बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। जिससे जाहिर तौर पर आम आदमी का बजट बिगड़ने वाला है।

वाणिज्य एवं उद्योग संगठन एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज की थोक और खुदरा कीमत के अंतर को हर हाल में कम किया जाना चाहिये। भिन्न थोक मंडियों में प्याज जहां 1800 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रहा है वहीं खुदरा विक्रेता इसे 30 से 35 रुपये प्रति किलोग्राम पर बेच रहा हैं।

एसोचैम ने बताया कि प्याज की कीमत में इस स्तर से और बढ़ोतरी उपभोक्त मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा महंगाई में और तेजी ला सकता है। प्याज प्रत्येक परिवार के लिए आवश्यक खाद्य वस्तु है और इसके दाम में बढ़ोतरी होना आम लोगों के साथ साथ राजनीतिक पार्टियों के लिए भी मुसीबत की तरह रहा है।

संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, पैदावार घटने से भंडार में भी कमी आ सकती है। इसलिए, उपभोक्तओं तक पहुंचने से पहले प्याज के बेहतर भंडारण की आवश्यकता है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात, देश में प्याज की कुल पैदावार में दो-तिहाई से अधिक का योगदान देते है। इसमें अकेले महाराष्ट्र का हिस्सा करीब 30 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मौसम और कीमत के आधार पर देश में प्याज की खपत 80 लाख टन से 1.2 करोड़ टन के बीच है। इससे प्रति माह खपत 10 लाख टन और सालाना खपत का औसत एक करोड़ 20 लाख टन बैठता है। इस प्रकार भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था न होने और सड़ने-गलने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुये देश में हर साल करीब 1.4 करोड़ टन प्याज की जरूरत है।

गौरतलब है, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति मई में 5.01 प्रतिशत पर थी। पिछले साल जून में यह 6.77 फीसदी के स्तर पर थी।

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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