मानव जीवन को कहीं व्यर्थ खो देना

मानव जीवन को कहीं व्यर्थ खो देना

आर्यसमाज ब्यावर द्वारा विश्व कल्याण के लिए आयोजित वृष्टि यज्ञ के दूसरे दिन आर्य समाज मंदिर में देवयज्ञ, भजन और उपदेश कार्यक्रम हुए। आर्य समाज अध्यक्ष ओमप्रकाश काबरा ने बताया कि मंगलवार को यज्ञ के यजमान ज्योति-लोकेश धूत, प्रिय-तरुण धूत, अंजू-मनीष झंवर रेण-रवि धूत बने।

सभी से यज्ञ के ब्रह्म आचार्य डॉ. वेदपाल शास्त्री द्वारा वेदमंत्रों से यज्ञ में आहुतियां दी गई। इसके बाद संगीतमय यज्ञ प्रार्थना हुई। दिल्ली से पधारे शास्त्री ऋषभ द्वारा मधुर भजन जीवन की राहों पर मत हार के रो देना..मानव जीवन को कहीं व्यर्थ खो देना…, दयानंद देव वेदों का उजाला लेकर आए थे…, घर-घर में ऊॅं की पावन पताका लेकर आए थे…, मेरे प्रभु ने जगत रचाया…दुनिया क्या जाने…जैसे मधुर भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उपमंत्री अभय धूत, संजय बाहेती ने बताया कि भजन के बाद मेरठ से पधारे आर्य जगत के विद्वान डॉ. वेदपाल शास्त्री ने अपने व्याख्यान में कहा कि दुनिया को वेद पढ़ने का अधिकार स्वामी दयानंद सरस्वती ने दिलाया। संसार में जो कुछ भी उत्पन्न हुआ उसका बिगड़ना या समाप्त होना निश्चित है। लेकिन जो उस परमात्मा ने बनाया वो ना बिगड़ता है ना समाप्त होता है। प्रकृति, धरती, आकाश इसके उदाहरण है।

कार्यक्रम में प्रधान ओमप्रकाश काबरा, हरिदेव आर्य, इंद्रदेव आर्य, सत्यनारायण मालानी, मानकरण हेडा, सुखदेव आर्य, राजेंद्र काबरा, महेश मालू, सुनीता, शारदा, वंदना, प्रिया धूत, सुशीला काबरा, रोहित बजारी, विशाल काबरा, सत्यप्रकाश झंवर, बलवंत कुमार आर्य, कैलाश छीपा, लालाराम पहलवान समेत आर्य कन्या महाविद्यालय और गोदावरी स्कूल की छात्राएं अन्य लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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