खाप पंचायत जैसा फैसला, बेटी ने हक मांगा तो 10 साल तक बहिष्कार

खाप पंचायत जैसा फैसला, बेटी ने हक मांगा तो 10 साल तक बहिष्कार
उदयपुर. यदि किसी बहन-बेटी ने पीहर से हक मांगा तो उसे दस साल के लिए समाज के बाहर कर दिया जाएगा। डबोक क्षेत्र के विजणवास में गुरुवार को एक समाज विशेष के गामटी बनावल और बेरगटा के पंचों की बैठक में कुछ कुरीतियों को समाप्त करने सहित 8 निर्णय लिए गए। एक कागज पर सभी निर्णय लिखे गए और इसके बाद कई गांवों के पंचों व प्रतिनिधियों ने इन पर हस्ताक्षर किए।
निर्णय पत्र के आठवें बिंदु में यह खाप पंचायत जैसा फैसला लिखा गया। हालांकि यह भी तय किया गया कि ससुराल पक्ष के पांच पंच सच्चाई का पता लगाएंगे तब फैसला दिया जाएगा। इस मामले पर एसपी राजेंद्र प्रसाद गोयल का कहना है कि मामले की जानकारी कराएंगे। ऐसा कुछ सामने आने पर निर्णय लेने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विवाद बढ़ा तो ये बोले प्रतिनिधि
इस निर्णय पर विवाद बढ़ने पर बैठक में मौजूद रहे भींडर पंचायत समिति के पूर्व प्रधान चमनशेखर सुथार ने भास्कर को बताया कि कुछ कुरीतियों को खत्म करने के लिए बैठक की गई थी। कुछ लोगों ने बहन-बेटियों के हक मांगने पर समाज से बहिष्कृत करने की बात कही थी, लेकिन इस पर सर्वसम्मति से कोई निर्णय नहीं लिया गया। यदि निर्णय पत्र में इस बिंदु को शामिल कर सभी के हस्ताक्षर हैं तो इसमें संशोधन कराया जाएगा। समाज कानून प्रक्रिया के खिलाफ जाकर कोई निर्णय नहीं लेगा।
ये निर्णय भी लिए गए
> परसादी, मुंडन संस्कार, वीटी गोल, कथा पर केवल मामा, बुआ और ससुराल पक्ष की पहरावणी स्वीकार होगी। कोई जबरदस्ती मंगवाएगा तो 21 हजार रुपए जुर्माना।
> वैवाहिक संबंंध विच्छेद पर जिस पक्ष की गलती सिद्ध होगी उसे दो वर्ष के लिए बहिष्कृत किया जाएगा। एक लाख रुपए का जुर्माना भी।
> समाज की बहू-बेटी को खोले (ससुराल में किसी परिवार को पीहर पक्ष का दर्जा देना) नहीं रखी जाएगी।
> पगड़ी दस्तूर के दौरान बीड़ी-सिगरेट और अमल (अफीम) नहीं बांटी जाएगी।

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Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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