केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के नाम खुला पत्र

केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के नाम खुला पत्र

 वाहन जुर्माना पर 

केन्द्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के नाम खुला पत्र

माननीय गडकरी जी
केन्द्रीय परिवहन मंत्री
वन्दे मातरम!

वाहन जुर्माना में बदलाव के बाद उसके असर पर नजर रखे हुए था। सोचा, अच्छे रिजल्ट और विपरीत असर पर भी आपको बधाई या शिकायती खुला पत्र लिखने का प्रयास करूंगा। दुख है। आशानुरूप परिणाम नही आ रहे है। मैं आम लोगो के बीच विचरण करता हू। इसीलिए व्यापक जनसम्पर्क भी है। वाहन जुर्माना में व्यापक बदलाव लागू करने के साथ ही होना यह चाहिए था। वाहन चालकों को तीसेक दिन का समय देते। आपने तो ट्रैफिक पुलिस के हाथों में पहले दिन से ही लट्ठ पकड़ा दिए! इसके बनिस्बत यह करते:

जिसके कागजात पूरे नही होते। उसे पूरा करने की वार्निंग मिलती। ऐसा कोई जतन करते कि दूसरी बार पकड़े जाने पर उसे दी गई पहली वार्निंग पकड़ी जाती। फिर भले ही जुर्माना ठोकते! ( इस मद में बीमा,फिटनेस, ड्राइविंग लायसेंस, प्रदूषण टोकन,आर सी आदि शामिल हो सकते है )

गडकरी जी, यो भी नियमों में शुमार है। मौके पर कागजात नही होने पर चालक बाद में भी निश्चित अवधि में दिखा सकता है। उसके लिए अलग-अलग मद में नाम मात्र के जुर्माने का प्रावधान है। मंत्री जी आपने इस दशा में भी नही सोचा? पुलिस को मनमानी खुली छूट क्यो दे दी…?

हेलमेट नही होने पर मौके पर ही उसे खरीदने को बोलते। जिसकी वही व्यवस्था रहती। दुबारा-तिबारा फिर पकड़ा जाता! यही क्रम रहता! बार-बार जेब कटती देख हौस ठिकाने लग जाते। ( वैसे माननीय मंत्री जी आपको बता दू कि शहरों में जहाँ 3-4 किमी की ही दूरी तय करनी होती है वहां हेलमेट व्यवहारिक भी नही हो पाता। पहले तो सड़को पर खड्डे,स्पीड ब्रेकर व बेतहाशा ट्रैफिक! इस सबके बीच दुपहिए की स्पीड ही नही बनती। शायद यही कारण रहा कि नागपुर में आप भी स्कूटर पर बिना हेलमेट को चलने को बाध्य हो गए। आपकी उस मजबूरी को भी पूरे देश ने देखा है। हाँ… लम्बी दूरी में बहुत जरूरी है )

कार में सीट बेल्ट नही लगाने की दशा में जुर्माना वसूल लेते। फिर भी जागरूकता की दृष्टि से पाँचेक दिन “वार्निंग डे” चलाते। अच्छा सन्देश जाता।

माननीय गडकरी जी आपके बारे में आम धारणा है कि आप ऊर्जावान है। दूर भविष्य की सोचते है। काम को भी तय पीरियड में पूरा करने को कृतसंकल्परत रहते है। फिर ऐसी क्या मजबूरी रही कि आपने इसे लागू करने से पहले कुछ भी आगा-पीछा नहीं सोचा! कुछेक राज्यो ने जहां आपकी ही पार्टी की सरकारें है। उन्होंने भी इसे फिलहाल लागू करने से दूरी बनाए रखी है। इसके क्या कारण रहे होंगे? आपने मनन किया है! निश्चित रूप से वे भी तो लोगो की जान-माल की सुरक्षा पर संवेदनशील होंगे।

माननीय गडकरी जी देखिएगा पूरे देश मे इससे अराजकता का माहौल बना हुआ है। वाहन चालकों पर पुलिस जिस तरह “पिल” रही है! देश-विदेश हैरान है। मंत्री जी आपको आपका एक वादा याद दिलाना चाहूंगा। पिछली सरकार में अपने पहले साल में निजी छोटे चौपहिया वाहनों को शीघ्र ही टोल मुक्त करने की घोषणा की थी? देश जवाब मांग रहा है! उसका क्या हुआ? वाहन चालकों को हैरान परेशान करने में इतनी फुर्ती…!! वही उनको राहत देने में वादा खिलाफी…? यह कैसा न्याय है।

गडकरी जी आपके बयान को देश देख रहा है। आप इसमें कोई भी संशोधन नही करने को अडिग है। लोकतंत्र-जनतंत्र में ऐसे नही चलता है। जनता जनार्दन की पीड़ा सुनने के खातिर आपको चुना गया है। जनता की वाजिब पीड़ा पर पीछे हटना “मूंछ नीची होना” कतई नही होता। इसे स्मरण रखने से ही नेता “जन नेता” बनता है। आपसे विनम्र आग्रह है। गम्भीरता से मनन-मंथन करे। सरकार का उद्देश्य जनता से धन बटोरना ही नही होना चाहिये। वाहन की कुछेक कमियों पर चालको को हाथोंहाथ भी रिलीफ दिया जा सकता है। आखिर उससे भी सरकार को धन तो मिल ही रहा है। वैसी दशा में जनता को जरूर राहत मिलेगी। सरकार को इसी दिशा में सोचना चाहिए।
धन्यवाद…
विनम्र:
पत्रकार सिद्धार्थ जैन
ब्यावर (राज.)
094139 48333

About Author

Hemendra Soni

M.D. & Chief Editor of BeawarDailyNews.com

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